Wednesday, February 18, 2026
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जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मंदिर के पास बनेगा शंकराचार्य मंदिर, आज LG करेंगे शिलान्यास

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav Published : Feb 18, 2026 06:41 am IST, Updated : Feb 18, 2026 06:49 am IST

छह दशकों के इंतज़ार के बाद लोग आखिरकार आज एलजी मनोज सिन्हा द्वारा शंकराचार्य जी मंदिर के शिलान्यास समारोह के गवाह बनने जा रहे हैं। यह मंदिर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन के पास की पहाड़ियों पर है। श्री शंकराचार्य जी मंदिर बनाने का आइडिया असल में 1967 में आया था।

एलजी मनोज सिन्हा - India TV Hindi
Image Source : ANI एलजी मनोज सिन्हा। फाइल

जम्मूः आदि शंकराचार्य को समर्पित श्री शंकराचार्य मंदिर कॉम्प्लेक्स जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले की त्रिकुटा पहाड़ियों में बनेगा। लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) मनोज सिन्हा आज यानी बुधवार को मंदिर की नींव रखेंगे। त्रिकुटा पहाड़ियों में माता वैष्णो देवी मंदिर भी है। अधिकारियों ने कहा कि मंदिर प्रोजेक्ट के 1967 में पहली बार विचार किया था लेकिन लगभग छह दशक बाद अब इसका शिलान्यास होने जा रहा है।

 माता वैष्णो देवी के बेस कैंप कटरा में ये भी बनाने का प्रस्वाव

अधिकारियों ने बताया कि "यह स्टेट-ऑफ-द-आर्ट मंदिर लेफ्टिनेंट गवर्नर के नेतृत्व में सोचा गया एक और बड़ा प्रोजेक्ट है। इससे पहले पूरे भारत के प्रमुख 'देवी' तीर्थ स्थलों की रेप्लिका और रिप्रेजेंटेशन वाली देवियों का एक म्यूजियम भी रियासी जिले में माता वैष्णो देवी के बेस कैंप कटरा में बनाने का प्रस्ताव है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने श्री शंकराचार्य मंदिर के साथ-साथ एक एक्सेस रोड, उससे जुड़ी पब्लिक यूटिलिटीज़ और ज़मीन मालिकों के लिए 50 कमर्शियल दुकानें बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी अनुमानित लागत 31.51 करोड़ रुपये है।

दान की गई 41 कनाल ज़मीन पर बनेगा मंदिर

अधिकारियों के मुताबिक, SMVDSB और संबंधित ज़मीन मालिकों के बीच 2025 में एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किया गया था। उन्होंने बताया कि मंदिर ज़मीन मालिकों द्वारा दान की गई 41 कनाल ज़मीन पर बनेगा, जिसे प्रस्तावित जगह पर एक मोटरेबल एक्सेस ट्रैक बनाने और तीर्थयात्रियों के लिए ज़रूरी सुविधाएं, जैसे टॉयलेट और पानी के पॉइंट बनाने के लिए दिया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से भक्तों के आध्यात्मिक अनुभव में काफ़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, साथ ही बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और रोज़गार के मौकों के ज़रिए क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रोजेक्ट यह पक्का करेगा कि आध्यात्मिक केंद्र जीवंत बना रहे, जिसमें तीर्थयात्रियों की भलाई और स्थानीय समुदायों के समावेशी विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा।  

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